Importance of semen preservation(Celibacy)

Importance of semen preservation(brahmacharya)

sprem preservation (brahmacharya)is very essential

* “Rasad raktam tato mamsam mamsanmedhah prajayate; Medasosthi tato majja majjayah sukrasambhavah— from food comes juice or chyle, from chyle blood, from blood flesh, from flesh fat, from fat bones, from bones marrow and lastly from marrow semen.” Semen is the quintessence of food or blood. One drop of semen is manufactured out of 40 drops of blood according to the medical science. According to Ayurveda it is elaborated out of 80 drops of blood. Just as
sugar is all-pervading in the sugar-cane, butter in milk, so also semen is pervading the whole body.

* Just as the butter-milk is thin after butter is removed, so also semen is thinned by its wastage. The more the wastage of semen the more is the weakness.Why do you lose the energy that is gained in many weeks and months for the sake of a little momentary sensual pleasure?

* In Yoga Sastras it is said: “Maranam bindupatanat jivanam bindu-rakshanat” —falling of semen brings death and preservation of semen gives life.” Semen is the real vitality in man. It is the hidden treasure for man. It imparts Brahma-Tejas to the face and strength to the intellect.

*Ojas is spiritual energy that is stored up in the brain. By sublime thoughts, meditation, Japa, worship and Pranayama, the sexual energy can be transmuted into Ojas energy and stored up in the brain. This energy can be utilised for divine contemplation and spiritual pursuits.

*Brahmacharya(semen preservation) is the basis for acquiring immortality. Brahmacharya brings material progress and psychic advancement. It gives tremendous energy, clear brain, gigantic will-power, bold understanding, retentive memory. Those who have not observed the vow of celibacy become slaves of anger, jealousy, laziness and fear. If you have not got your senses under control, you venture to do foolish acts which even children will not dare to do.

*Discharge of semen only to produce offspring is also considered brahmacharya. sexual intercourse should not be performed at day time and especially at evening time if you wish for healthy and cultured children.Also intercourse should not be performed on full moon and no moon days.

*जो भोजन पचता है , उसका पहले रस बनता है। (भोजन से रस बनने में ५ दिन लगते हैं) पाँच दिन तक उसका पाचन होकर रक्त बनता है। पाँच दिन बाद रक्त से मांस , उसमें से ५ – ५ दिन के अंतर से मेद , में से हड्डी , हड्डी से मज्जा और मज्जा से अंत में वीर्य बनता है। स्त्री में जो यह धातु बनती है उसे ‘ रज ‘ कहते हैं। इस प्रकार वीर्य बनने में करीब ३०दिन व ४ घण्टे लग जाते हैं। वैज्ञानिक बताते हैं कि ३२ किलो भोजन से ८०० ग्राम रक्त बनता है. और ८०० ग्राम गृह ओज मनुष्य को परम लाभ-आत्मदर्शन कराने में सहायक बनता है। आप जहाँ-जहाँ भी किसी के जीवन में कुछ विशेषता, चेहरे पर तेज, वाणी में बल , कार्य में उत्साह पायेंगे , वहाँ समझो वीर्यरक्षण का ही चमत्कार है।

*परमात्मा द्वारा अपनी सारी शक्ति बीज रुप में मनुष्य को दी गई है। वह शक्ति कुण्डलिनी कहलाती है। आधुनिक परमाणु विज्ञान की भाषा में कुण्डलिनी (अटॉमिक रिएक्टर) है | मूलाधार चक्र में कुण्डलिनी महाशक्ति अत्यन्त प्रचण्ड स्तर की क्षमताएँ दबाए बैठी है। पुराणों में इसे महाकाली के नाम से पुकारा गया है। कामशक्ति का अनुपयोग , सदुपयोग, दुरुपयोग किस प्रकार मनुष्य के व्यक्तित्व को प्रभावित करता है , उसे आध्यात्मिक काम विज्ञान कहना चाहिए। इस शक्ति का बहुत सूझ-बूझ के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए, यही ब्रह्मचर्य का तत्व ज्ञान है। बिजली की शक्ति से अगणित प्रयोजन पूरे किए जाते हैं और लाभ उठाए जाते हैं , पर यह तभी होता है जब उसका ठीक तरह प्रयोग करना आए , अन्यथा चूक करने वाले के लिए तो वही बिजली प्राणघातक सिद्ध होती है।

*क्या आपने कभी यह सोचा है कि शेर इतना ताकतवर क्यों होता है? वह अपने जीवन में केवल एक बार बच्चों के लिये मैथुन करता है। जिस वजह से उसमें वीर्य बचा रहता है और वह इतना ताकतवर होता है।
हमारे भारतवर्ष में एसे महान राजा, ऋषि, महात्मा हुए जो शेर से भी लड लेते, हमारे शरीर के वजन जीतने शस्त्र उठा कर युद्ध लड लेते, उनकी मुठ्ठी मे जकडन थी, खुन मे चुंबकीय आकर्षण था ।आज के युवाओं ने वीर्य नाष करके खुद को कमजोर बना लिया है और बल, बुद्धि, तेज, नेत्रज्योति, धातु का नाश कर रहे हैं मेडीकल साइंस कहता है ये प्राकृतिक है और वीर्य को बहाने से कुछ नहीं होता पर इन बातों को सुनकर अपने आप को बर्बाद ना करे।आप आयुर्वेद के सिद्धांतो पर चले।

*परशुराम, हनुमान,भीष्म ,कालिदास ,तुलसीदास रामकृष्ण परमहंस ,विवेकानंद ,स्वामी रामतीर्थ महात्मा बुद्ध महान ब्रह्मचारी थे।
(जो केवल संतान प्राप्ति के लिए सम्भोग करे वह स्त्री पुरुष भी ब्रह्मचारी कहे गए है)

*आयुस्तेजोबलं वीर्यं प्रज्ञा श्रीश्च महदयशः | पुण्यं च प्रीतिमत्वं च हन्यतेऽब्रह्मचर्या ||
‘आयु, तेज, बल, वीर्य, बुद्धि, लक्ष्मी, कीर्ति, यश तथा पुण्य और प्रीति ये सब ब्रह्मचर्य का पालन न करने से नष्ट हो जाते हैं |’

यदि कोई १२ साल तक,बिना रुकावट के, कठोर और सटीक ब्रह्मचर्य का पालन करता है(मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से) तो एक नाड़ी जिसको मेधा नाड़ी कहा जाता है,सक्रिय हो जाती है,जागृत हो जाती है और उस व्यक्ति को भूत,वर्त्तमान और भविष्य की जानकारी आने लागती है,एवं वह महासमाधि में कभी भी प्रवेश कर सकता है।उस व्यक्ति की मेधा इतनी ज्वलंत हो जायेगी के वह किताब के पन्ने को एक बार मात्र देखने से सदा के लिए याद रख सकेगा।इसे फ़ोटो मेमोरी भी कहते है।

If one can observe strict and perfect Brahmacharya(Celibacy) without a break for 12 years, then a particular nerve called Medha nadi develops in a person. With the development of this nerve, one gets the sixth sense (super consciousness), by which one can know the past, present and future and enter the mahasamadhi (bliss) state any time and also develops the power of photo memory.

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

w

Connecting to %s