अण्डा और मांसाहार हानिकारक है (Eggs and Meat are dangerous)

Eggs are bad for health

Do you know that eggs have little amount of nutritional value? They are totally deficient in
carbohydrates. The eggs are full of poisonous and harmful elements. Egg is the cause of several serious diseases; the high cholesterol content increases the risk of heart disease. The hens eat sputum, phlegm, nose secretions, worms, germs and other such filthy things. The eggs are produced from these things. Can egg increase the mental and intellectual quality of a person?

The following facts prove that egg is very low, dirty and the biggest enemy of health when compared to other food products. Eggs have lowest amount of nutritional elements:
1. Protein : Dals 22-25%; Eggs 13.3%; Paneer 24.1%; Separata Milk powder 38%; Soybean 43.2%

2. Carbohydrates : Dals 56 – 60%; Eggs 0%;Soybean 22.9%; Paneer 6.3%; Separata milk Powder 15%

3. Calorie : Dals 334-353; Eggs 173; Lobhia 327;Paneer 348; Milk powder 357

4. Calcium : Dals 0.13-0.20%; Eggs 0.06%;Soybean 0.24%; Paneer 0.79%;separata milk Powder 1.37%

5. Iron : Dals 8.4-9.8%; Eggs 2.1%; Soybean 11.5%;Roasted gram 8.9%

6. Phosphorous : Dals 0.25-0.37%; Eggs 0.22%;Roasted peanuts 0.44%; Paneer 0.52%; Separata
milk powder 1.4%

7. Mineral salts : Dals 2.1-3.6%; Eggs 1.0%;Soybean 4.6%; Roasted peanuts2.3%; Paneer 4.2%;
Separata milk powder 6.8%

Eggs contain high amounts of cholesterol, which causes high blood pressure and kidney problems.
Frying an egg increases its cholesterol level further.
Heart specialist Dr. col. K.L.Chopda and Dr.K.K.Agarwal says that the yoke of egg contains 220
mg cholesterol, which is dangerous for the heart.
Nobel prize winner Dr. Brown and Dr.Goldstin have proved that eggs contain high amount of cholesterol and hence increase the risk of heart attack.

DDT poison:
30 per cent of the eggs contain DDT poison. This causes cancer, this was discovered by Lorida,
America’s agricultural department.

Evidin:
The egg white contains Evidin, which causes eczema and paralysis.

Acid:
The eggs contain nitrogen and phosphoric acid,which produces acidic substances in the body,
which makes the person diseased.

Infectious bacteria:
The upper layer of the egg contains 15000 micro
holes. The infectious bacteria entering the egg through these pores – salmonella, shigola and
Staphylococci. these bacteria are responsible for disease of the intestines, due to which thousands
of Indians die every year. Several thousands of people in England became the victims of a
poisonous epidemic only because of salmonella bacteria.

Egg generates kapha(cough):
According to a German professor Egtur Burg, Egg is responsible for generating 51.83 per cent of
phlegm, which imbalance the nutrition’s in the body and become the abode of dieses.

Eggs are not easily digestible:
Bile and pancreatic juices of egg are ineffective on egg white. Therefore 30 to 50 per cent of egg is excreted without being digested. This is the view of Professor Akoda of England.

Decay of food in the stomach:
According to Dr. E.V. Mekkalam the eggs do not contain carbohydrates and the amount of calcium is also very low, hence it decays in the stomach.

Eggs contain very less amount of vitamins: eggs contain very little quantity of iron, magnesium and
vitamins. Especially vitamin B complex and vitamin C.

Egg causes diseases in any form:
Prof of microbiology in the university college of medicine, Dr. V.Talwad says that egg causes
different types of disease whether eaten raw or in any other form.
Hens have lot of diseases:
The hens are carriers of bacteria and germs responsible for diseases like T.B and infect the
persons eating it. (Dr. Robert Grass)

Hens are subjected to torture:
The following methods of tortures are applied on hens in order to get more and faster production of eggs:
– The hens are given injections of special hormones for egg formulation.
– The male chickens are made to sit under the hot Sun and are not allowed to sleep to make them young quickly.
– More hens are fitted in to the farms, where they cannot flap their wings, they bite one another and get injured.
– The hens are forced to sit in the sheds throughout the day.
– The wings and beaks are chopped off with the help of hot metallic instruments and machines.This hard truth was mentioned in the world-renowned book, height for a new America, written by John Robins.
– Is it not foolishness to eat eggs containing 13 per cent protein and sacrificing vegetable food items containing 22 to 43-pr cent protein?
– Is it not stupidity to eat eggs, which are responsible for generating serious diseases instead of nutritious and healthy vegetarian food.
– Is it good to eat eggs 173 calories or vegetarian food containing 327 to 432 calories?
– Are we not encouraging violence and cruelty by eating the poor creatures that are subjected to different kinds of cruelty?

Inspirational factors for quitting eggs:Eating eggs and meat is against the Vedas

Another Reason to be vegetarian

1.हृदय रोग व उच्च रक्त चाप- इस रोग का मुख्य कारण है रक्त वाहिनियों की भीतरी दीवार पर कोकेस्ट्रोल का जमना। मांस और अण्डे में कोलेस्ट्रोल बहुत अधिक होता है। 100 ग्राम अण्डे में आवश्यकता से ढाई गुणा अधिक कोलेस्ट्रोल होता है।

2. आंतों का अल्सर, अपैंडिसाइटिस, आंतों और मलद्वार का कैंसर- यह रोग मांसाहारियों में शाकाहारियों की अपेक्षा कई गुणा अधिक होता है।

3. गुर्दे की बीमारियाँ- अधिक प्रोटीनयुक्त भोजन गुर्दे को खराब करता है। मांसाहारी आवश्यकता से अधिक प्रोटीन खा लेता है। शाकाहार में अधिक प्रोटीन नहीं लिया जा सकता क्योंकि यह फैलावदार होने से कम खाया जाता है।

4. सन्धिवार, गठिया आदि- मांसाहार खून में युरिक एसिड की मात्रा बढाता है, जोडों पर युरिक एसिड का जमाव होने से ये रोग होते हैं ।

5. कैंसर- यह रोग मांसाहारियों में अधिक पाया जाता है।

6. आँतों का सडना- अण्डा, मांस आदि खाने से आमाशय कमजोर होता है और आंते सड जाती हैं।

7. विषावरोधी शक्ति का क्षय- अण्डा, मांस खाने वाले से विषावरोधी शक्ति नष्ट हो जाती है, जिससे मनुष्य साधारण सी बीमारी का सामना नहीं कर पाता।

8. त्वचा रोग- त्वचा की रक्षा के लिये आवश्यक विटामिन गाजर, टमाटर तथा हरी सब्जियों में अधिक होता है। अतः शाकाहार ही त्वचा की रक्षा करता है। मांसाहार में विटामिन A की मात्रा न होने के कारन वह त्वचा में अनेक रोग उत्पन्न कर देता है।

9. माइग्रेन इंफेक्शन आदि के कारण होने वाले रोग- ये रोग मांसाहारियों में अधिक पाये जाते हैं। मांसाहार से होने वाले रोगों के अनेक कारण हैं: हत्या से पूर्व पशु, पक्षियों आदि के स्वास्थ्य की पूरी जाँच नहीं की जाती, जिससे उनके शरीर में छुपी हुई बीमारियों का पता नहीं लगता। ऐसे रोगग्रस्त पशुओं का मांस खाने से उनके अन्दर छुपे हुए रोग खाने वालों को भी हो जाते हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार वेनवग नाम का ऐसा कीडा होता है कि उसके काटने से पशु पागल हो जाता है। किंतु पागलपन
का यह रोग विकसित होने में और प्रकट होने में 10 वर्ष लगते हैं। इस मध्य कोई भी व्यक्ति इस कीडे द्वारा काटे हुए पशु के मांस को खा लेता है, तो पागल हो जाता है।

हत्या से पूर्व पशु अपनी रक्षा के लिये प्रयास करता है, फडफडाता है, निस्सहाय होने के कारण उसका डर और आवेश बढ जाता है, क्रोध से आँखें लाल हो जाती हैं, मुँह में झाग आ जाते हैं. ऐसी अवस्था में उसके अन्दर एडरीनालिन नामक जहरीला पदार्थ उत्पन्न हो जाता है। जब मनुष्य अनजाने में उस पशु का मांस खाता है तब यह जहरीला पदार्थ उसके अन्दर प्रवेश कर उसे अनेक घातक बीमारियों का शिकार बना लेता है। खून और बैक्टीरिया का इंफैक्शन अतिशीघ्र हो जाता है। अतः पशु के मरते ही मांस सडने लगता है और यह सडा हुआ मांस जब खाने वाले के शरीर में पहुँचता है तो वह असाध्य रोगों का शिकार अन जाता है।

प्रयोगों से ज्ञात हुआ है कि अण्डे यदि 50डिग्री से अधिक तापमान पर 12 घण्टे से अधिक समय तक रहें, उनके अन्दर
सडने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है। ऐसी स्थिति में भारत जैसे देश में जहाँ तापमान सदैव इससे अधिक रहता है और अण्डों को पोल्ट्री फॉर्म से तैयार हो कर बिक्री होने तक प्रायः 24 घण्टे का समय लग जाता है, अब उसमें सडने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो जाती है। जब अण्डे सडने लगते हैं, तब उनका जलीय भाग पहले कवच में से भाप बनकर उडने लगता है, फिर रोगाणुओं का आक्रमण शुरु होता है, जो कवच में पहुँचकर उसे पूरी तरह सडा देता है।

 सूक्ष्म स्तर पर सडे हुए अण्डे पहचाने न जाकर काम में के लिये जाते है, जिससे उधर विकार, फूड पॉयजनिंग आदि रोग हो जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया जहाँ सर्वाधिक मांस खाया जाता है और जहाँ प्रतिवर्ष प्रतिव्यक्ति 130 किलो गोमांस की खपत है, वहाँ आंतों का कैंसर सबसे अधिक है। Dr. Andrew Gold ने अपनी पुस्तक Diabities Its Cause Ant Treatment में शाकाहारी भोजन की सलाह दी है।

So Much Violence is produced by the killing of animals, where do you think the reactions to this violence goes? It comes back to us in so many ways, such as the form of neighborhood and community crime, and on up to world wars. Violence breeds violence. 

Therefore, every several years there is a big war in various areas of the world which causes wholesale slaughter of
people. This is the reaction of nature for the immense cruelty produced by humankind.

मानव को प्रकृति द्वारा शाकाहारी बनाया गया है। मानव के शाकाहारी होने के साक्ष्य :

१. मांसाहारी प्राणियों के केनाईन दांतो की बनावट मोटी चमडी में गड़ाकर शिकार को प्राणरहित करने में समर्थ है चिरफाड़ के लिए नुकीले दाँत होते हैं। ये आहार को चबा नहीं सकते उसे टुकड़े टुकडे कर निगलना पडता है।
शाकाहारी और मनुष्य- दोनों में तेज नुकीले दाँत नहीं होते जबकि इनमें मोलर दाँत होते हैं। इनके दांत आहार को चबाने में समर्थ होते है जिन दो दांतो को केनाईन कहा जाता है वे
माँसाहारी प्रणियों के केनाइन समान नहीं है।

२. मनुष्य की आँतोँ का विकास मांस पचाने के लिए नहीँ हुआ है मांसाहारी जानवर अपने जबडे
केवल ऊपर या नीचे ही हिला सकते हैं ..
जबकि शाकाहारी जानवर व मानव अपने जबड़े चार संभव दिशाओं में हिला सकते हैं… इससे पता चलता है कि हम शाकाहारी प्रवृति वाले जीवधारी हैं..

३. जानवर दो तरह के होते हैं… एक जो पानी पीने के लिए उसे चाटते हैं यानी जीभ से पानी पीते है ,जैसे कुत्ता, बिल्ली, शेर जो कि मांस खा सकते हैं..
आप बिल्ली या कुत्ते को पानी पीते देखिए वो जीभ से पानी पीते हैँ।
और दूसरे जो पानी पीने के लिए उसके घूंट लेते चूसते और निगलते हैं.. जैसे.. गाय, हिरण, घोडा आदि जो कि पूर्णतः शाकाहारी होते हैं..और हम भी दूसरी श्रेणी से सम्बंधित हैं..

४. यदि आप एक विक्षिप्त शव देखते हैं.. जिसके आस-पास बहुत सारा रक्त हो..
तो आपको वो अच्छा नहीं लगेगा,आपको घृणा आएगी और आप वहां से दूर जाना चाहेँगे… क्योंकि आप शाकाहारी हो…जबकि यह एक कुत्ते या भेडिये के लिए मुंह में पानी आने वाला दृश्य होगा… क्योँकि ये प्रवृति मांसाहारी है।

५. मांसाहारी पशुओं की आंत छोटी होती है ताकि ..मांस को जल्द से जल्द शरीर से बाहर कर सकेँ… जबकि शाकाहारी जानवरों की आंत बडी होती हैं.. यही वजह है कि जो व्यक्ति केवल
मांस खाता है उसके उत्सर्जन
अंगोँ की सांद्रता बढ़ी व उत्सर्जन उत्पाद अधिक सांद्र प्रकृति लिए होते है …क्योँकि इनकी आंते
शाकाहारी खाद्य पचाने हेतु निर्मित हुई होती है।

६. माँसाहारी- शेर , कुत्ते,विड़ाल इत्यादि तीव्र और हाँफते हुए सांस लेते है। श्वसन दर १८० से ३०० तक होती है।
शाकाहारी और मनुष्य- मनुष्य सहित गाय , बकरी ,हिरन , खरगोश, भैंसे इत्यादि सभी धीमे – धीमे से सांस लेते है। इनकी श्वसन दर ३० – ७० श्वास
प्रति मिनट तक होती है।

७. माँसाहारी-इनमें स्वेद ग्रंथियाँ/त्वचा में रोम छिद्र नहीं होते इसलिए ये प्राणी जीभ के माध्यम से शरीर का तापमान नियंत्रित करते हैं।
शाकाहारी और मनुष्य- इनके शरीर में रोम छिद्र /स्वेद ग्रंथियां उपस्थित होती हैं और ये पसीने के माध्यम से अपने शरीर का तापमान नियंत्रित रखते हैं।

कुल मिलाकर मानव शरीर शाकाहार हेतु बना हुआ है, मांसाहारी प्रोपेगेँडा विधर्मियोँ और विदेशी पढाई वाले डॉक्टरों (Allopathic Doctor’s ) द्वारा फैलाया गया है।
यदि आपको कर्म के सिद्धांत में विश्वास नहीं है तब भी मैं आपसे नैतिक आधार पर शाकाहारी होने के लिए निवेदन करुंगा…
और कृपया संवेदनशील प्राणियों के लिए दया का भाव रखें…

आप बेजुबान जानवरों पर दया नही कर सकते तो भगवान आप पर दया क्यों करेंगे.. अपने पेट को स्वाद के लिए कब्रिस्तान न बनाएं और इसका प्रसार करने में
सहायता करें।

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