सुंदर कथा ४६(श्री भक्तमाल – श्री कर्माबाई ) Sri Bhaktamal – Sri Karmabai

श्री कर्माबाई जी नामकी एक भगवद्भक्ता देवी श्री पुरुषोत्तम पुरी (जगन्नाथ पुरी)में रहती थीं । इन्हें वात्सल्य भक्ति अत्यन्त प्रिय थी । ये प्रतिदिन नियमपूर्वक प्रात:काल स्नानादि किये बिना ही खिचडी तैयार करतीं और भगवान् को अर्पित करतीं थी । 

प्रेम के वश में रहनेवाले श्रीज़गन्नाथ जी भी प्रतिदिन सुघर- सलोने बालक के वेशमें आकर श्री कर्मा जी को गोद में बैठकर खिचडी खा जाते । श्री कर्मा जी सदा चिन्तित रहा करती थीं कि बच्चे के भोजन में कभी भी विलम्ब न हो जाय । इसी कारण वे किसी भी विधि विधान के पचड़े में न पड़कर अत्यन्त प्रेम से सबेरे ही खिचडी तैयार कर लेती।

एक दिन की बात है । श्री कर्मा जी के पास एक साधु आये । उन्होंने कर्मा को अपवित्रता के साथ खिचडी तैयार करके भगवान् को अर्पण करते देखा । घबराकर उन्होंने श्रीकर्माजी को पवित्रता के लिये स्नानादि की विधियां बता दीं । भक्तिमती श्री कर्मा जी ने दूसरे दिन वैसा ही किया । पर इस प्रकार खिचडी तैयार करते उन्हें देर हो गयी । उस समय उनका हृदय रो उठा कि मेरा प्यारा श्यामसुन्दर भूख से छटपटा रहा होगा ।

श्री कर्मा जी ने दुखी मन से श्यामसुन्दर को खिचडी
खिलायी । इसी समय मन्दिर में अनेकानेक घृतमय पक्वान्न निवेदित करने के लिये पुजारी ने प्रभु का आवाहन किया ।प्रभु  जूंठे मुँह ही वहाँ चले गये ।

पुजारी चकित हो गया । उसने देखा उस दिन भगवान् के मुखारविन्द में खिचडी लगी है । पुजारी भी भक्त था  उसका हदय क्रन्दन करने लगा । उसने अत्यन्त कातर होकर प्रभु से असली बात जानने की प्रार्थना को । 

भगवान ने कहा – नित्यप्रति प्रात:काल मैं कर्माबाई के पास खिचडी खाने जाता हूँ । उनकी खिचडी मुझे बडी मधुर और प्रिय लगती है । पर आज एक साधुने जाकर उन्हें स्नानादि की विधियाँ बता दीं ,इसलिये खिचडी बनने में देर हो गयी, जिससे मुझे क्षुधा का कष्ट तो हुआ ही, शीघ्रता में जूंठे मुँह आ जाना पडा ।

भगवान की आज्ञानुसार पुजारी ने उस साधु को  प्रभु की सारी बातें सुना दीं । साधु घबराया हुआ श्री कर्माजी के पास जाकर बोला- आप पूर्व की ही तरह प्रतिदिन सबेरे ही खिचडी बनाकर प्रभु को निवेदन कर दिया करे । आपके लिये किसी नियम की अनावश्यकता नहीं है । श्री कर्माबाई पुन: उसी तरह प्रतिदिन सवेरे भगवान को खिचडी खिलाने लगी ।

श्री कर्माजी परमात्मा के पवित्र और आनन्दमय धाम मे चली गयी, पर उनके प्रेमकी गाथा आज भी विद्यमान है । श्री जगन्नाथ जी के मंदिर में आज़ भी प्रतिदिन प्रात:काल खिचडी का भोग लगाया जाता है ।

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