सुंदर कथा १०२ (श्री भक्तमाल – श्री कल्याणदास जी ) Sri Bhaktamal – Sri Kalyandas ji

श्री कल्याण दास जी सन्त सेवी सदगृहस्थ थे । आप ब्राह्मण कुल मे उत्पन्न हुए थे और श्री राघवेन्द्र सरकार आपके इष्टदेव थे । एकबार आपके यहां कन्या का विवाह था । जाति बिरादरी के साथ साथ सन्तो को भी आपने आमंत्रित कर रखा था । जब भोजन का समय हुआ तो आपने संतो की पंगत पहले करा दी । इससे अन्य ब्राह्मण लोग बड़े असन्तुष्ट हुए और कहने लगे कि इन साधुओ की जाति-पाँति का कोई पता नही है, आपने इन्हे कैसे पहले खिला दिया ? इसपर आपने सबको समझाते हुए कहा कि संतों का “अच्युत” गोत्र होता है और ये समस्त विश्व का कल्याण करनेवाले होते है । सन्त धरा धामपर साक्षात् भगवान् श्री हरि के प्रतिनिधि होते है, अत: उनके पहले प्रसाद ग्रहण कर लेने से आप सब को असन्तुष्ट नही होना चाहिये ।

इस प्रकार की इनकी सन्त निष्ठा देखकर अन्य ब्राह्मण भी प्रसन्न एवं सन्तुष्ट हो गये । आपके यहा सन्त-सेवा चल रही है सुनकर और भी बहुत से आमंत्रित सन्त भी आ पहुंचे । यह देखकर बिरादरी के लोग कहने लगे-अभी आपके घराती और बराती बाकी ही है, अगर आप इन आमंत्रित सन्तो को भोजन करा देंगे तो उनके लिये क्या बचेगा ? इसपर आपने कहा-चिन्ता करने की बात नहीं है, संतो को खिलाने से कम नही पड़ता, सारी पूर्ति रामजी करेंगे । यह कहकर आपने सब संतो को भोजन करा दिया, फिर जब घरातियों-बारातियों को खिलाने की बात आयी तो आपने पंगत मे सब को बैठवा दिया और परोसने वालों से परोसने को कहा । प्रभुकृपा से सभी ने पूर्ण तृप्ति का अनुभव किया और भोजन मे किसी भी प्रकार की कमी नहीं आयी । रसोइया कहने लगे इतना भोजन तो हमने बनाया ही नही था, फिर भी समाप्त नही हुआ । सन्त-कृपा का ऐसा चमत्कार देखकर सब लोग धन्यधन्य कह उठे ।

श्री कल्याणदास जी संतो और वैष्णव स्वरूप में भी बड़ी श्रद्धा रखते थे ।एक बार की बात है , श्री कल्याण जी अपने भाई के साथ उत्सव-दर्शनार्थ श्रीधाम वृन्दावन को जा रहे थे । मार्ग में आपने देखा कि एक दुष्ट धनी सरावगी एक दिन वैष्णव को कुछ पैसों के लिए डांट-फटकार लगा रहा है , दुख दे रहा है ।यह देखकर आपको बहुत दुख हुआ । आपने न केवल उन वैष्णव महाभाग का सारा कर्जा उतारकर उस दुष्ट सरावगी से मुक्ति दिला दी, बल्कि उन्हें पर्याप्त धन- धान्य देकर सुखी भी कर दिया। ऐसे उदार मन थे श्री कल्याणदास जी ।

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श्री गणेशदास कृपाप्रसाद को एक उत्तर दें जवाब रद्द करें

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