श्री नर्मदा नदी का प्राकट्य

इस ब्रह्मसृष्टिमें पृथ्वीपर नर्मदाका अवतरण तीन बार हुआ है । प्रथम बर पाद्मकल्पके प्रथम सतयुगमें, द्वितीय बार दक्षसावर्णि मन्वन्तर के प्रथम सतयुगमें और तृतीय बार वर्तमान वैवस्वत मन्वन्तर के प्रथम सतयुगमें । तीनों बार की नर्मदा अवतरण की कथाएँ इस प्रकार है:

प्रथम कथा – इस सृष्टिसे पूर्व की सृष्टिमें समुद्रके अधिदेवतापर ब्रह्माजी किसी कारण रुष्ट को गये और उन्होंने समुद्र को मानवजन्म धारणका शाप दिया, फलत: पाद्मकल्पमें समुद्रके अधिदेवता राजा पुरुकुत्स के रूपमें पृथ्वीपर उत्पन्न हुए । पढना जारी रखे