सुंदर कथा ६२ (श्री भक्तमाल – श्री रायमल जी) Sri Bhaktamal – Sri Raimal ji

श्री रायमल जी स्वामी किल्हदेवजी महाराज के शिष्य थे ।श्री रायमल जी का तेज-प्रताप, करनी-कस्तूति सब कुछ अद्भुत था, अत: इनकी अद्भुत छाप थी । रायमल जी के द्वारा अनेक चमत्कार हुए , जिनका साधुजन वर्णन करते है । संतो की सेवा रायमल जी बड़े सम्मान के साथ करते थे । एक बार रायमल जी ध्यान लगाकर श्री सीताराम जी की मानसी सेवा कर रहे थे । होली के दिन थे, उद्दण्ड प्रकृति के कुछ लोग आकर इनपर भी धूल डालने लगे । कुछ देरतक तो इन्होंने मौन रहकर सहन किया । संतो को क्रोध आता नहीं परंतु बहार से वे क्रोध का नाटक कर दिया करते है जिससे लोगो को अनुशासन ,मर्यादा में रहने की शिक्षा और संतो का आदर करने की शिक्षा मिले । 

उन बदमाश् लोगो से इन्होंने कहा कि बस, अब हो गया मेरे भजन में तुम लोग विघ्न न करो । इतनेपर भी जब लोग नहीं माने, तब रायमल जी उन्हे शिक्षा देने के लिये किंचित् क्रोध किया और कहा कि किसी संत पर फूल बरसाओगे तो तुम्हारे ऊपर भी फूल बरसेंगे और यदि धूल बरसाओगे तो तुम्हारे ऊपर भी धूल बरसेगी । इतना कहते ही उन लोगोंपर आकाश से कंकड और धूल बरसने लगी । वे लोग इधर उधर भागने लगे परंतु जहाँ भाग भाग कर गये वहाँ भी बरसती रही । गाँव के वयोवृद्ध व्यक्ति जान गये की संत का अपराध हुआ है । तब वयोवृद्ध ग्रामवासियों ने उन सब को साथ ले जाकर श्री रायमल जी से क्षमा-याचना की, तब धूल बरसनी बन्द हुई । इस प्रकार श्री रायमल जी ने लोगो को प्रभावित करके सबको भक्ति-पथ का पथिक बनाया ।